मक्के की फसल पर प्रकृति की मार: बिहपुर (बिहार) के किसानों का दर्द
खेती को भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से प्रकृति के मिजाज पर निर्भर है। हाल ही में बिहार के बिहपुर इलाके से आई एक तस्वीर दिल दहला देने वाली है। यहां आए तेज हवा और भारी बारिश की वजह से जमीन पर बिछ गई है।
फसल का नुकसान और किसानों की चिंता
मक्के की खेती में किसान अपनी जमा-पूंजी, खाद, बीज और महीनों की कड़ी मेहनत लगाता है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि तेज हवाओं ने पौधों को जड़ से हिला दिया है। जिसके कारण सभी पौधे मलवा की तरह बिखर गए।
प्राकृतिक आपदा और जलवायु परिवर्तन
तस्वीर में लगा बोर्ड—“मक्के की फसल पर प्रकृति का प्रहार”—साफ तौर पर यह संदेश देता है कि अनिश्चित मौसम अब खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बेमौसम बारिश और चक्रवाती हवाएं अब पहले से कहीं अधिक तीव्र और अप्रत्याशित हो गई हैं।
दियारा के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित।
वैसे तो पूरे बिहार में फसल की क्षति हुई है लेकिन सबसे ज्यादा क्षति दियारा में खेती करने वाले किसानों की है । साल में एक फसल उगाने वाले किसान पूरे उल्लास के साथ श्रृण लेकर सूद पर पैसा लेकर इस उम्मीद में खेती करते हूं कि इस बार बेटी की शादी करेंगे , पढ़ने के लिए बचूको बाहर भेजेंगे लेकिन इस बेमौसम बारिश सब उम्मीद पर पानी फेर देता है।
क्या चाहते हैं किसान
किसानो का कहना है वो अपना सब जमा पूंजी, कर्ज लेकर, या सूद पर पैसा लेकर खेती करते हैं और बेमौसम बारिश सबकुछ बर्बाद कर देती है । सरकार को जल्द से जल्द इसकी जांच कर क्षति पूर्ति किसानों को दे ताकि किसानों का कम-से-कम जमा-पूंजी वापस हो।
