बिहपुर (भागलपुर): पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाला बिहपुर जंक्शन कभी अंग क्षेत्र के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता था। लेकिन आज, यह स्टेशन अपनी उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रहा है। स्थानीय यात्रियों और व्यवसायियों के मन में एक ही सवाल है— आखिर बिहपुर स्टेशन की तस्वीर कब बदलेगी?
वर्तमान चुनौतियाँ: सुविधाओं का अभाव
भारतीय रेलवे ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत देश के सैकड़ों स्टेशनों का कायाकल्प कर रही है। हालांकि, पड़ोसी स्टेशनों (जैसे नवगछिया या खगड़िया) की तुलना में बिहपुर को उस गति से विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं किया गया है जिसकी यहाँ आवश्यकता है
।
“बिहपुर को केवल एक ठहराव के रूप में नहीं, बल्कि एक हब के रूप में विकसित करने की जरूरत है, क्योंकि यहाँ से रेल और सड़क (NH-31) दोनों का बेहतर संपर्क है।”
विकास के लिए क्या है जरूरी?
बिहपुर स्टेशन की तस्वीर बदलने के लिए निम्नलिखित सुधार अनिवार्य हैं:
एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: राजधानी और नॉर्थ ईस्ट जैसी बड़ी ट्रेनों के ठहराव की मांग वर्षों से लंबित है। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र का विकास भी होगा।
डिजिटल डिस्प्ले और आधुनिक पूछताछ केंद्र: यात्रियों को समय पर सूचना देने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग।
सर्कुलेटिंग एरिया का सौंदर्यीकरण: स्टेशन के बाहर के अतिक्रमण को हटाकर उसे व्यवस्थित और हरा-भरा बनाना।
बिहपुर की तस्वीर बदलना केवल रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी विषय है। जब तक स्थानीय जनप्रतिनिधि और रेल अधिकारी समन्वय बनाकर ‘मास्टर प्लान’ पर काम नहीं करेंगे, तब तक यात्री इसी तरह सुविधाओं के लिए तरसते रहेंगे।
उम्मीद है कि आने वाले वित्तीय वर्ष के बजट में बिहपुर को वह स्थान मिलेगा जिसका वह हकदार है। आखिरकार, एक बेहतर स्टेशन ही एक विकसित बिहपुर की पहचान बनेगा।
