प्रशासनिक सुधार: अब सीधे CMO की रडार पर होंगे ब्लॉक और थाने
बिहार सरकार ने सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए यह घोषणा की है कि राज्य के सभी अंचल (Anchor), थाना (Police Station) और ब्लॉक (Block) अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की निगरानी में रहेंगे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को होने वाली परेशानियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
1. सीधे निगरानी की आवश्यकता क्यों?
अक्सर यह देखा गया है कि आम नागरिक को सबसे अधिक कठिनाई ब्लॉक, थाना और अंचल कार्यालयों में होती है। चाहे वह जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) हो, जाति-निवास प्रमाणपत्र बनवाना हो, या प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराना हो—इन जगहों पर बिचौलियों और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं।
- भ्रष्टाचार पर नकेल: सीएमओ की सीधी निगरानी से अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी।
- काम में तेजी: फाइलों के निष्पादन में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।
- बिचौलियों का अंत: जब निगरानी उच्च स्तर से होगी, तो स्थानीय स्तर पर सक्रिय दलालों का प्रभाव कम होगा
- 2. नई व्यवस्था के प्रमुख प्रावधान
- सम्राट चौधरी के अनुसार, इस नई व्यवस्था के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं:
- डिजिटल मॉनिटरिंग: अंचल और ब्लॉक के कार्यों को डैशबोर्ड के जरिए ट्रैक किया जाएगा। कौन सी फाइल कितने समय से लंबित है, इसकी जानकारी सीधे पटना मुख्यालय को होगी।
- शिकायत निवारण: यदि किसी थाने या अंचल में किसी नागरिक की सुनवाई नहीं होती है, तो वह सीधे पोर्टल या हेल्पलाइन के जरिए शिकायत कर सकेगा, जिसकी समीक्षा सीएमओ स्तर पर होगी।
- अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड: अब अधिकारियों की प्रोन्नति और पोस्टिंग उनके द्वारा निपटाए गए कार्यों और जनता के फीडबैक के आधार पर तय की जाएगी।
- 3. ‘थाना’ और ‘अंचल’ पर विशेष जोर
- जमीन संबंधी विवाद बिहार में अपराध का एक मुख्य कारण रहे हैं। अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार के कारण अक्सर विवाद बढ़ते हैं।
- अंचल: दाखिल-खारिज और मापी जैसे कार्यों को पारदर्शी बनाया जाएगा।
- थाना: पुलिस की कार्यशैली में सुधार और पीड़ितों की समय पर सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।
